Monday, September 28, 2015

तेरे याद में

चेहरे किताब पर जाते ही
खो जाता है ये मन
तेरे यादों के समन्दर में
तेरे जुल्फों के लटके झटके में
तेरे खिलखिलाहट में
तेरे मुस्कराहट में
तेरे मौजों में
तेरे रवानी में
तेरे साथ ना बीती कहानियों में
तेरे साथ बीते रूखे सूखे पल में
तेरे चाल में
तेरे नजाकत में
तेरे चमक में
तेरे खनक में 
तेरे आवाज़ में 
तेरे आवाज़ को सुनने के ललक में
तेरे देखने में 
तेरे देखने के अंदाज़ में 
तेरे आँखों में 
तेरे मृगनैनी आँखों में 
तेरे दिल से उठती धड़कन में 
तेरे आँखों से बयाँ होती पल में
खो जाता हूँ 
बस खो जाता हूँ 
शांत हो जाता हूँ 
बस तेरे चेहरे से निकलते चमक में .

अगर सचमुच तुम होते पास
सचमुच तुम दूर नहीं रहते
कौन कहता है कि तुम दूर हो 
हर वक़्त तुम पास ही रहते .

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