कई दिन से कर रहा मुझे लिखुँ तुझ पे गान
दूर से बैठ कर यहीं से छेड़ूँ मैं तुम पर तान
तेरी बोल सुनने को तरसे मेरे सुने सुने कान
कहाँ बैठे हो गोरी छुपाकर अपनी मीठी तान
देखने को कर रहा वो हलकी हलकी मुस्कान
गोरे गोरे गालों वाली तेरी गुलाबी लाली जान
कहाँ छुपे बैठे हो चुलबुली सी अलबेली जान
कई दिन से कर रहा था कि लिखुँ तुझपे गान
यादों के सहारे जी रहा केवल पूरा हूँ अन्जान
तुम कैसे हो नहीं बताने की क्यों ली तूने ठान
पूछूं मैं किस से हाल तेरा बताओ भी मेरी जान
नयन तरस रहा देखने को मीठी मीठी मुस्कान
लिखने को कर रहा था कई दिन से तुझ पे गान
खोने को कर रहा है तेरे मृगनयनों में मेरी जान
तेरे आँखों के समंदर में डूब जाता हूँ मैं यादों में
महकते हुए गुलाबी गुलाबों में हरे भरे बागों में
गाने को कर रहा था कई दिन से तुझ पे गान
लिखूं मैं गाना सुनाऊँ छेड़कर मैं अपनी तान
चिढ़ाने को कर रहा था कई दिन से तुम्हें युहीं
छूने को दिल कर रहा था तुम्हें बातों से युहीं
कहाँ छुपे बैठे हो अनाड़ी सुन भी लो मेरी तान
लिखने को कर रहा कई दिन से तुझ पे गान
तुम पूछो न हमसे क्यों लिखते हो मेरी गान
बस झूम लो पढ़कर मुस्कुराते हुए मेरी जान
कई दिन से कर रहा मुझे लिखुँ तुझ पे गान
दूर से बैठ कर मैं सुनाऊँ तुझे अपनी तान
दूर से बैठ कर यहीं से छेड़ूँ मैं तुम पर तान
तेरी बोल सुनने को तरसे मेरे सुने सुने कान
कहाँ बैठे हो गोरी छुपाकर अपनी मीठी तान
देखने को कर रहा वो हलकी हलकी मुस्कान
गोरे गोरे गालों वाली तेरी गुलाबी लाली जान
कहाँ छुपे बैठे हो चुलबुली सी अलबेली जान
कई दिन से कर रहा था कि लिखुँ तुझपे गान
यादों के सहारे जी रहा केवल पूरा हूँ अन्जान
तुम कैसे हो नहीं बताने की क्यों ली तूने ठान
पूछूं मैं किस से हाल तेरा बताओ भी मेरी जान
नयन तरस रहा देखने को मीठी मीठी मुस्कान
लिखने को कर रहा था कई दिन से तुझ पे गान
खोने को कर रहा है तेरे मृगनयनों में मेरी जान
तेरे आँखों के समंदर में डूब जाता हूँ मैं यादों में
महकते हुए गुलाबी गुलाबों में हरे भरे बागों में
गाने को कर रहा था कई दिन से तुझ पे गान
लिखूं मैं गाना सुनाऊँ छेड़कर मैं अपनी तान
चिढ़ाने को कर रहा था कई दिन से तुम्हें युहीं
छूने को दिल कर रहा था तुम्हें बातों से युहीं
कहाँ छुपे बैठे हो अनाड़ी सुन भी लो मेरी तान
लिखने को कर रहा कई दिन से तुझ पे गान
तुम पूछो न हमसे क्यों लिखते हो मेरी गान
बस झूम लो पढ़कर मुस्कुराते हुए मेरी जान
कई दिन से कर रहा मुझे लिखुँ तुझ पे गान
दूर से बैठ कर मैं सुनाऊँ तुझे अपनी तान
No comments:
Post a Comment