Monday, July 11, 2016

मुस्कुराहट दर्द भरी

मुस्कान पर चन्द शेर ..

मत दे तोहमत मुझे मुस्कुराने का

कौन ग़रीब मुस्कुराना चाहता है 
वो कैसे मुस्कुराते थे हकीकतन 
यादों में उनकी हाजिरी लगता है 

आज दिल सुना है,लिखने को लफ्ज भी नहीं सूझता

पर वो जान ले कैसे भी मेरा हाल,कुछ लफ्ज लिखता

दिल में होता है तूफ़ान ला दे,नदी का नदी उड़ेल दे

पर कैसे भी वो सामने आये और खुदा एक कर दे 

कहाँ है आज वो, यादों के तीर खूब चलाये जा रहे हैं

छलनी हो रहा है ये दिल और वो दूर से मजे ले रहे हैं

कितना अच्छा तो ये इश्क है,मुस्कुराहट बस निकलती

वो इस तरह क्यों तड़पाते,क्या उन्हें समझ नहीं आती 

कत्ल कर दो हमें,अगर इश्क गुनाह है तेरे नजर में 

हाँ इश्क तुझसे करता हूँ,डूबना है तेरे मुस्कुराहट में

नहीं चाहता प्रचार करना तेरे मेरे इश्क का

तुझे जरूरत है तू ढोल बजा इस सगूफ़े का 

ऐसा नहीं कि चुपचाप हमें इश्क में रहना है 

रैन बसेरा में संग संग तेरे संग मुस्कुराना है 

मुझे नहीं चाहिए इस दुनिया से केवल तेरे सिवा

तुझे अगर कुछ चाहिए कमा लूँगा तेरे लिए मेवा 

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