नशा पर चन्द शेर अर्ज़ है ..नीचे एक समाचार से प्रेरित..
लोग मुर्ख हैं जो नशा में लाते हैं ना जाने किस किस चीज को
एक बार प्यार का नशा कर ले भूल जायेंगे अन्य नाशाओं को
मत बर्बाद हो नशा करने में ऐ बन्दे
काहिल लोग ही नशा को बढ़ावा देते हैं
नशा करके किसी को होश रहता कहाँ
ज्ञान की कितनी रौशनी आप गवाँ देते हैं
मत पूछ ऐ कामचोरों कि नशा मैंने किया या नहीं किया
है प्यार का नशा, यह अन्य नशा को फटकने नहीं दिया
दर्द ऐसा नहीं कि मुझे नहीं पर विष पीने से क्या फायदा
जब तू पीने के बाद इंसान रहा ही नहीं,फिर क्या फायदा
मत नशा कर, इतना कहूँगा, सोच-तू काहिल नहीं है
जिन्दा है तो कर्म कर, आराम तो मरने के बाद भी है
मजा करने के लिए जो पीते,शायद वो प्यार चखे नहीं है
बेहोशी में कैसे देख पाएंगे,वे जुल्फें बांधे या खुले रखे हैं
पीना है तो प्यार का नशा पी, यादों में भी वे पीला देते
उनका मुस्कराना गजब ढाता,सूखे सूखे ही जीला देते
लोग मुर्ख हैं जो नशा में लाते हैं ना जाने किस किस चीज को
एक बार प्यार का नशा कर ले भूल जायेंगे अन्य नाशाओं को
मत बर्बाद हो नशा करने में ऐ बन्दे
काहिल लोग ही नशा को बढ़ावा देते हैं
नशा करके किसी को होश रहता कहाँ
ज्ञान की कितनी रौशनी आप गवाँ देते हैं
मत पूछ ऐ कामचोरों कि नशा मैंने किया या नहीं किया
है प्यार का नशा, यह अन्य नशा को फटकने नहीं दिया
दर्द ऐसा नहीं कि मुझे नहीं पर विष पीने से क्या फायदा
जब तू पीने के बाद इंसान रहा ही नहीं,फिर क्या फायदा
मत नशा कर, इतना कहूँगा, सोच-तू काहिल नहीं है
जिन्दा है तो कर्म कर, आराम तो मरने के बाद भी है
मजा करने के लिए जो पीते,शायद वो प्यार चखे नहीं है
बेहोशी में कैसे देख पाएंगे,वे जुल्फें बांधे या खुले रखे हैं
पीना है तो प्यार का नशा पी, यादों में भी वे पीला देते
उनका मुस्कराना गजब ढाता,सूखे सूखे ही जीला देते

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