Thursday, July 7, 2016

इस दिल में तू ही तू है

ये जिंदगी कितना सकून देता है
जब दिल के रास्ते पर चलता है 
हर तरफ मौजें ही मौजें फैलता
जीने के राह में एक जूनून देता है 

भीड़ भाड़ भरे रुके राह भी 
रवानी के रंग में सराबोर होते
हल्ला गुल्ला गली-नुक्कड़ भी 
संगीत से अठखेलियां खेलते

ये जिंदगी के राह बड़े चैन से कटते
कहीं चिंता नहीं,कोई फ़िक्र ना होती
जब ये जिंदगी में अपने दिल में होती
जब ये जिंदगी दिल अनुसार चलती

दर्द को भी कहता, मत फटक तू मेरे पास
मेरे साथ मेरा जूनून है तू मत रह आसपास
अगर कभी गलती से कोई दर्द आता पास
ये दिल उसे निपटाकर कहता मत रह पास

कहाँ से इतना जूनून आता,क्या है ये दिल
कहाँ सेआत्मविश्वास जगाता,क्या है दिल
कहाँ से इतनी रंगीनियाँ लाता,क्या है दिल
सबकुछ तो इस दिल का है, यही है दिल

ये दिल है तभी तो ये शरीर है,हम जीते हैं
पर लोग कहते ये शरीर है- तभी दिल है 
गौर करें-दिल ना होने पर हम मर जाते हैं
तन को जला देते हैं,ये दिल भी खो जाते हैं 

अब आप ही निष्कर्ष निकालो,गौर करो
दिल धड़कता है तभी तक यह शरीर है 
बिन धड़कन के इस तन का वजूद नहीं है 
इस दिल में तू ही तू है, तभी तो ये दिल है 

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