कल बहार आई थी,उनकी याद आई थी
रोजों की तरह उनकी याद आई थी
साधना के बाद, पुरे जगत में ,
बस केवल उनकी याद आई थी
क्या मुस्कराहट थी उनकी
मेरे रोम-रोम खिल गए
क्या चमक थी उनमे
मेरे अंग-अंग दमक गए
क्या सुगंध थी उनमे
मेरे रूह महक गए
फिर अचानक बहार आ गई
उनके लहराते बाल याद आ गए
फिर बारिश से भरी दोपहर आ गई
उनके भींगे लटों की याद आ गए
दिल कसक के रह गया
कि पुकार लू उन्हें
कि बात कर लूँ उन्हें
सोये से उनको जगाऊँ,रूठे को मनाऊँ
पर उन्होंने इसका हक़ नहीं दिया
सन्देश भी भेजा पर उन्होंने जवाब भी नहीं दिया
दूरभाष पे संख्यां अंकन कर के रह गया
फिर मिटा के संख्यां को देखता रह गया
पहले भी उन्होंने कोई ध्यान नहीं दिया
मैं बस आकाश में देखता रह गया
फर्क केवल इतना है ...
उन्हें औरों में भी मैं जैसा दिख जाता हूँ
पर मुझे पुरे दुनिया में केवल वही दीखते हैं
आँखों से नीर बहते गए
बारिश में मिलके घुलते गए
मृगनैनी याद में खोते गए
बस उनके याद में ....होते गए ..होते गए
रोजों की तरह उनकी याद आई थी
साधना के बाद, पुरे जगत में ,
बस केवल उनकी याद आई थी
क्या मुस्कराहट थी उनकी
मेरे रोम-रोम खिल गए
क्या चमक थी उनमे
मेरे अंग-अंग दमक गए
क्या सुगंध थी उनमे
मेरे रूह महक गए
फिर अचानक बहार आ गई
उनके लहराते बाल याद आ गए
फिर बारिश से भरी दोपहर आ गई
उनके भींगे लटों की याद आ गए
दिल कसक के रह गया
कि पुकार लू उन्हें
कि बात कर लूँ उन्हें
सोये से उनको जगाऊँ,रूठे को मनाऊँ
पर उन्होंने इसका हक़ नहीं दिया
सन्देश भी भेजा पर उन्होंने जवाब भी नहीं दिया
दूरभाष पे संख्यां अंकन कर के रह गया
फिर मिटा के संख्यां को देखता रह गया
पहले भी उन्होंने कोई ध्यान नहीं दिया
मैं बस आकाश में देखता रह गया
फर्क केवल इतना है ...
उन्हें औरों में भी मैं जैसा दिख जाता हूँ
पर मुझे पुरे दुनिया में केवल वही दीखते हैं
आँखों से नीर बहते गए
बारिश में मिलके घुलते गए
मृगनैनी याद में खोते गए
बस उनके याद में ....होते गए ..होते गए

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