Tuesday, July 8, 2014

अच्छी बात - सच्ची बात

जब तुमने मुँह मोड़ लिया था मेरे से 
दिल मेरा टूट गया  था तेरी कसम से 
तेरी दुरी को मान लिया था हमने  तुमसे
फिर भी न दूर पाया दिन रात तुझसे 
रात दिन तड़पते सोचा,
जब करूँगा तुझसे बात 
बस करूँगा सच्ची बात 
अच्छी बात, अच्छी बात,
अच्छी अच्छी अच्छी अच्छी  
अच्छी बात, सच्ची बात 

हरी झंडी देख के , 
बांछे मेरी खिल गई 
ऐसा ना कहो सनम 
तुम हो शंकर की पार्वती
दिल में ही रहते हैं 
शीश पे ही सजते हैं
देख के यह सुलझी बात 
तुझे देखने की हो गई 
बात करने से पहले 
तुझे देखने की हो गई 
दिखा भी दे मृगनयनी आँखे 
अँखियाँ मेरी तरस गई 
तुमसे करता हूँ अभी.. सच्ची बात 
अच्छी बात, अच्छी बात,
अच्छी अच्छी अच्छी अच्छी  
अच्छी बात, सच्ची बात 

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