Friday, July 11, 2014

कारण तो लिख दिया था मैंने

कारण तो लिख दिया था मैंने
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अभी तो शुरुआत है दिल जलने की 
ऐसा तो मैं तेरे लिए कितना जलाया 
ज़ाम भी कम हो जाते थे महफ़िल में 
तभी तो मैंने पीना ही छोड़ दिया 

ये राह तो  है जलने की, ना  की, जलाने की 
राह है तड़पने की, सोना सी चमक जाने की 
देखा नहीं तूने दो तारों को मिलते 
एक तड़प होती-घुलते-मिलते मिल जाने की 

कारण तो लिख दिया था मैंने
कि कुछ का कुछ समझ हुआ 
बैठे थे तुम साकी के महफ़िल में 
नशा मुझे यहाँ सुरूर हुआ 

दिल जो जलाये साकी की महफ़िल में 
सब जानते जाम किसी का नहीं हुआ 
मुझे आवाज़ दे समझा देते 
रात भर का सर दर्द यूँही हुआ 

सचमुच तेरे महफ़िल की खुशबू 
आज मुझे फिर से है याद दिलाया 
तुम्हे शायद मालूम नहीं हो 
उसदिन जानबूझकर था चिढ़ाया  ;)

तुम भी अनजान थे बेखबर से 
कहा की बात कहा ले बैठे 
मुझसे अगर पूछ लिया होता 
सच में बोला होता-आओ साथ बैठे 

अब लिखने को दिल नहीं करता 
बस कहने -सुनने को दिल करता है 
बहुत हो गए दिल में रखे -रखे 
अब ये दिल  बहुत कुछ कहता है 

देखा तुझे ताल से ताल मिलाते 
दे दिया आवाज़ बात करने को 
पर तुम शायद मुस्कुरा रहे थे 
क्यों नहीं उठाये बात करने को 

सच समझ में नहीं आया मुझे ,
क्यों नहीं दिखा वो तड़प तुझमे 
अब तेरी बारी है आवाज़ देने की 
देखूँ जरा, कैसी  तड़प है तुझमे 

मृगनैनी, मैं हुँ बहुत सीधा -साधा 
नहीं जानता  मैं छल-प्रपंच 
चाहता रहूँगा तुझे जीवन भर 
चाहे तू बुला ले हज़ार पंच 

अगर तेरी कोई है  मकसद 
मांग ले तू बिना झिझक 
स्वतः तेरी मुराद पूरी करने 
चढ़ जाऊंगा सूली पे बेझिझक 

मैं होता ही कहाँ हुँ अपने में 
जब तेरी बात है  निकलती 
चांदनी आ जाती अँधेरे में 
अपने आप बहार है बहती 

बैठा हुँ अब तेरे आवाज़ के इंतज़ार में 
ताले खुलने के बेकरारी के आलम में 
जहाँ से होगी तेरी बात-मेरी बात 
अपनी बात-सच्ची बात-अच्छी बात 


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