Monday, August 4, 2014

फूल खिलते हैं

तुम जब भी मिलते थे, फूल खिलते थे 
आज मिल गए, देख लो-कैसे फूल खिलते थे 

पहले फूल के खिलने का मतलब पता नहीं था 
अब मह्सूसता हूँ ,  क्यों फूल खिलता था 

यह दिल का राग होता है,मधुर तान होता है 
शब्दों का मेल में, दिल का गाना होता है 

उड़ने को चिड़िया कब से थी बेचैन 
पंख फड़फड़ा के देखो कैसे है भड़ी उड़ान 

तूफानों का समुन्दर कब से था दबा 
देखो कह रहा - अब प्रिय को रस में डूबा 

कैसे तेरे बोल हैं, सुनने को है बेक़रार 
उस शब्द की गूंज - आज भी है बरकार 

कितना भी लिखुँ शब्द, नहीं मिटता है प्यास 
देखो तेरे शब्द मिल के, कैसे महसूसते हैं प्यास 

तुम कितने अनमोल हो तुम नहीं जानते 
तुम को देखते ही, "मैं" "तुमसे" मिल जाते 

उन रंगो का अहसास ही है फूलों का खिलना 
तेरे खिळखिळ्हाट में हो जाता है रंगो का है मिलना 

तुम जब भी मिलते थे, फूल खिलते थे 
आज मिल गए, देख लो-कैसे फूल खिलते थे  :)



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