आज भी तुझे ख्याल आया
कि नहीं याद करना है मुझे
चलो कितना अच्छा है सबब
मैं बैठा रहा याद करते तुझे
दुनिया का बाजार बहुत है अलबेला
पहाड़ पे चढ़ जाओ,रह जाते अकेला
पर कितनी देर रह पाते अकेला
यह तो दिल ही जानता,जो है अकेला
दुनिया की याद तो आएगी ही
पहाड़ पे भी तुम्हारा याद आता
पर इससे तुम्हे क्या
तुम्हें तो दुनिया में मन लगता
दुनिया में जीते
दुनिया को भरमाते
दुनिया से बात करते
तेरे दुनिया में मैं नहीं होता
तुम मुझे रखना भी नहीं चाहते
तेरा पीछा जो करता था
तुम्हें छूने के लिए नहीं
पर तुम्हें देखने को
तुम्हें उड़ते महसूसने को
तुम्हें अच्छा नहीं लगा
तुमने दूर भेज दिया
तुम मुक्त हो गए
अब खुलकर उड़ सकते थे
खुल कर उड़ रहे हो
दुनिया का बाजार बना लिए
कई दुनिया बना दिए
अब कोई तुझे पीछा नहीं कर रहा
तुम मुक्त हो उन्मुक्त उड़ रहे
चलो-आज भी तुझे ख्याल आया
कि नहीं याद करना है मुझे
चलो कितना अच्छा है सबब
मैं ही याद कर लेता हूँ तुझे
तेरे बातों से यह तो लगा
कि अभी कोई तुझे रोकता है
कि अभी कोई तुझे टोकता है
कि ऐसे न करो, वैसे न करो
इसका तुम्हे पहले भी चिढ था
इसका तुम्हे अभी भी चिढ है
फर्क इतना है चेहरा बदल गया है
चलो-आज भी तुझे ख्याल आया
कि नहीं याद करना है मुझे
चलो कितना अच्छा है सबब
मैं ही याद कर लेता हूँ तुझे
तुम नहीं समझोगे
एक पिता का दर्द
तुम नहीं जानोगे
एक भाई का अहसास
तुम नहीं समझ सकते
एक प्रियतम का आस
तुम्हें केवल दीखता
ये सब है सारे बदहवास
इनका हाल जानने को
इनके रूप में जन्म लेना होगा
तब जाकर समझ सकते
कि मर्द क्या क्या होगा
अगर नारी और पुरुष के एक ही रंग होते
तो शायद ये प्रकृति कब की सिमट चुकी होती
इनके कई रंग है, इनके कई ढंग है
इन्हीं रंगो को समझने और समझाने
हम आते जाते रहते हैं
यह शरीर तो बस माध्यम है
आने जाने की एक गाड़ी है
कभी इस सड़क पे, कभी उस सड़क पे
चलती रहती है , जाती रहती है
जिंदगी के गीत गाती रहती है
और हम ज़िंदगी जीते रहते हैं
इसलिए मैं कहता हूँ और कहता रहूँगा
तुम कितने भी गर्त के काम करोगे
तुम्हारा ये शरीर करेगा
तुम शुद्ध-चैतन्य आत्मा हो
जो कभी मलिन नहीं होता
तुम अच्छे आत्मा हो
जो कभी नमकीन नहीं होता
बस मीठा-मीठा होता है
और वही मीठापन बिना चखे ही
मुझे महसूस होता था
जब भी तुझे देखता था
एक अहसास होता था
एक आस होता था
कभी दर्द नहीं-पर ख़ुशी होता था
कभी दुरी नहीं-पर अपना होता था
सपने भी अपना होता था
और जो अपना है सपना नहीं होता है
वह बस अपना होता है, अपना होता है
चलो-आज भी तुझे ख्याल आया
कि नहीं याद करना है मुझे
चलो कितना अच्छा है सबब
मैं ही याद कर लेता हूँ तुझे




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