हज़ार बातें
=========
मैं कैसे समझाऊँ तुझे
मैं बहुत परेशान रहता हूँ
दिन तो कैसे भी काट देता हूँ
पर हर रात में तेरी राह देखता हूँ
कि तू आओगे, मुझे बुलाओगे
बात करोगे, हाल पूछोगे
कुछ अपनी कहोगे, कुछ मेरी सुनोगे
और सुन के खिलखलाओगे
पर रात की सूं-सूं करती हवाएँ
डरा देती, घबरा देती, जता देती
तुम मशगूल होते चैट-बात करने में
मैं यहाँ परेशान रहता तेरे आस में
तुमसे दूर हुए कलैंडर दिन बताते हैं
पर मेरी नज़र में जैसे कल की बात हो
और आज-कल में तुम मुझे बुलाओगे
तुम जैसे कहोगे-कहो तुम कैसे हो
क्यों बनाते इतने चेहरे किताबों पे
असली चेहरा तो तुम छुपा के बैठे हो
दुनिया तो तुम्हें देखते ही हैं अच्छे से
केवल मुझसे अपना चेहरा छुपाते हो
क्यों इतना मुझसे शिकायत है
कह तो दो एक बार क्या बात है
मैं रुका हूँ राह में बस तेरे लिए
तेरे बिन आगे जाने का दिल नहीं करता है
कितने काम है पड़े आगे करने को
जीवन के उद्देश्य तय करने को
कहते हो बहार इधर आएगी नहीं
पर कैसे मिलोगे यह तो कहो मुझको
मैं तो तैयार हूँ मिलने को हिमालय से
पार्वती के मधुर सम्बन्धियों से
जो भी शर्त हो रहेंगे बस तेरे शर्त
मैं सब में तैयार हूँ बस साथ में चलने से
इसके लिए भी तो कहोगे अपनी बातें
कुछ बात तो करो आगे बढ़ने को
ऐसी भी क्या जिद्द है तुम्हें आन पड़ी
कुछ बताओ भी तो बात करने को
हज़ारों से करते तुम कुछ की कुछ बातें
मुझ बेकार से भी तो कर लो कुछ बातें
वादा -नहीं करूँगा तंग बात करने में
सलीके से करूँगा दिल की अपनी बातें
=========
मैं कैसे समझाऊँ तुझे
मैं बहुत परेशान रहता हूँ
दिन तो कैसे भी काट देता हूँ
पर हर रात में तेरी राह देखता हूँ
कि तू आओगे, मुझे बुलाओगे
बात करोगे, हाल पूछोगे
कुछ अपनी कहोगे, कुछ मेरी सुनोगे
और सुन के खिलखलाओगे
पर रात की सूं-सूं करती हवाएँ
डरा देती, घबरा देती, जता देती
तुम मशगूल होते चैट-बात करने में
मैं यहाँ परेशान रहता तेरे आस में
तुमसे दूर हुए कलैंडर दिन बताते हैं
पर मेरी नज़र में जैसे कल की बात हो
और आज-कल में तुम मुझे बुलाओगे
तुम जैसे कहोगे-कहो तुम कैसे हो
क्यों बनाते इतने चेहरे किताबों पे
असली चेहरा तो तुम छुपा के बैठे हो
दुनिया तो तुम्हें देखते ही हैं अच्छे से
केवल मुझसे अपना चेहरा छुपाते हो
क्यों इतना मुझसे शिकायत है
कह तो दो एक बार क्या बात है
मैं रुका हूँ राह में बस तेरे लिए
तेरे बिन आगे जाने का दिल नहीं करता है
कितने काम है पड़े आगे करने को
जीवन के उद्देश्य तय करने को
कहते हो बहार इधर आएगी नहीं
पर कैसे मिलोगे यह तो कहो मुझको
मैं तो तैयार हूँ मिलने को हिमालय से
पार्वती के मधुर सम्बन्धियों से
जो भी शर्त हो रहेंगे बस तेरे शर्त
मैं सब में तैयार हूँ बस साथ में चलने से
इसके लिए भी तो कहोगे अपनी बातें
कुछ बात तो करो आगे बढ़ने को
ऐसी भी क्या जिद्द है तुम्हें आन पड़ी
कुछ बताओ भी तो बात करने को
हज़ारों से करते तुम कुछ की कुछ बातें
मुझ बेकार से भी तो कर लो कुछ बातें
वादा -नहीं करूँगा तंग बात करने में
सलीके से करूँगा दिल की अपनी बातें

No comments:
Post a Comment