Saturday, August 6, 2016

बूँद बूँद

इसी बूँद बूँद से 
जिंदगी है चलता
इसी बूँद बूँद से
प्यास है बुझता
इसी बूँद बूँद से
जीवन तड़पता
यही बूँद बूँद तो
मज़ा भी देता
बूँद बूँद से ही
घड़ा भी भरता
इसी बूँद बूँद से
सागर भी बनता
इसी बूँदो में
मिठास भी होता
इसी बूँद में भी
कोई जहर पिरोता
इसी एक बूँद में
अमृत भी होता
यही एक बूँद
आँख को भर देता
यही बूँद कभी
चेहरा भी चमकाता
इसी बूँद से कभी
पसीना भी झलकता
यही बूँद बारिस बन
खेंतो को सींचता
कभी जुल्फों में आकर
गोरी को उलझाता
कपड़ों को भिंगाकर
कपकपी भी देता
क्या है ये बूँद
कितना अजूबा होता
जब उनकी याद
आँखों से लरजता
तब यादों के फूल बन
दिल में है बसता
कभी मुस्कुराता
कभी खिलखिलाता
बारिस के मौसम में
बूँद बूँद है बरसता
💦💧💧💦

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