Saturday, August 6, 2016

मत मायुष् हो वो नादान आँसू

मत मायुष् हो वो नादान आँसू
छलककर गिर पड़ते हो तनिक दुःख देखकर
कभी उन मृग्नयन को तो देखो
जो याद में ही तृप्त कर देते हैं मुस्कुराकर

आज भी बीतते हैं यादों में तेरे
संग संग बिताये एक एक पल
तुम जब होगे साथ, हरवक्त सोचता,
कितने सुहाने होंगे वो पल

मैं ही डर जाता कि
पता नहीं की तू फिर कहीं ना पिन चुभोये
बड़ी मुश्किल से
सम्भल पाया था मैं जब वो तूफ़ान थे आये

गलती किसकी किसका दोष
मैं दुनिया के नजर से ना देखता
मैं तो था डुबा तेरे प्यार में सनम
इतना ही मैं हूँ जानता मैं मानता

तुम हो रूठे तुम हो गुस्सा
इसका पता ही नहीं चलता
तू अगर अवसर देते रहने का
तेरा हर छन्द तब पता चलता

तेरे नखरे बहुत अच्छे होते हैं
तेरे तेवर सचमुच तीखे होते हैं
आशाएं मुझे हौसले देते रहते है
तेरे संग मुस्कुराउँ,सपने देखते हैं

अर्ज़ है ..
तेरा मुझसे रुठने का कुछ ही वक्त अभी गुजरा है
कोई बात नहीं, हमारी दोस्ती लम्बी चलने वाली है



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