एक छंद..जीवन पर..
लीला समझकर रीत निभाता जा
जीवन है एक सपना,समझता जा
यहीं कर ले प्रेम,मिले तो करता जा
ना भी मिले प्रेम,बस मुस्कुराता जा
जानते हुए भी कि राम खुद भगवान् है
रंगमंच की तरह वह कर्तव करता गया
दुनिया वाले दोष देते रहे निरी कैकई को
और वह दरिया बनकर बस चलता गया
जीवन कठिन नहीं है,संसार में बना कठिन
हम तो इस संसार के नहीं,क्यूँ बनाये कठिन
जब तक ज्ञान आता, समझते उम्र निकल गई
जब ज्ञान नहीं रहता,ये दुनिया हमें उलझा गई
इसी उलझन को सुलझाते हुए जीवन बहती है
किसी की याद में, प्रेम में, ये दुनिया सजती है
लीला समझकर रीत निभाता जा
जीवन है एक सपना,समझता जा
यहीं कर ले प्रेम,मिले तो करता जा
ना भी मिले प्रेम,बस मुस्कुराता जा
जानते हुए भी कि राम खुद भगवान् है
रंगमंच की तरह वह कर्तव करता गया
दुनिया वाले दोष देते रहे निरी कैकई को
और वह दरिया बनकर बस चलता गया
जीवन कठिन नहीं है,संसार में बना कठिन
हम तो इस संसार के नहीं,क्यूँ बनाये कठिन
जब तक ज्ञान आता, समझते उम्र निकल गई
जब ज्ञान नहीं रहता,ये दुनिया हमें उलझा गई
इसी उलझन को सुलझाते हुए जीवन बहती है
किसी की याद में, प्रेम में, ये दुनिया सजती है

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