Monday, May 16, 2016

मेरे शब्दों में जो होगा वही सजेगा

शब्दों में वो ही लिखेगा
जो दिल में होगा,मन में होगा
यहाँ दिल में तो तुम बसे हो
फिर शब्दों में तुम ही सजेगा

दिल करता है 
तुझे नींद से जगाऊँ
पलकों को खोलकर उठाऊँ
लंबी नाक को खींचूँ
तेरे गुस्से को फेकूँ
तेरे चेहरे पर मुस्कान बिखेरूँ
तेरे खिलखिलाहट में खो जाऊँ
उन गाल के गड्ढों में डूब जाऊँ
बिखरते लटों को सवारूँ
तेरे लावण्य नूर में चमकुँ
हल्के हल्के पदचाप करते 
समय के गति में संग संग खो जाऊँ 

मेरे शब्दों में गीतों में 
और कुछ ना मिलेगा
तुम ही मिलोगे-हिलोगे
जैसा मेरा दिल कहेगा 

तुझे देखते ही,ये अनुमान लगा पाता
कि कैसी रही होगी कृष्णा की राधा
या कैसी रही होगी शंकर की पार्वती
कैसे चले होंगे संग दोनों आधा-आधा 

कभी छाँव मद्धम कभी तेज धुप
कैसे छुपे होंगे दुपट्टा लेकर ओट
बड़े बड़े नयनों में चमक जगाये
मुस्कुराते जीवन होते लोट-पोट

कौन कहता है समय बीत जाता है
गोल धरती सा चल कर ये आता है
तारों नक्षत्रों को फिर से मिला देता है 
बीते पलों को फिर से जीला देता है 

मेरे शब्दों में वही सजेगा
जो मेरे तन-मन में खिलेगा
वही चमकेगा, वही बिखेरेगा
तेरे आने का इंतज़ार करेगा

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