कितनी दूर चल कर आया हूँ
कितनी दूर चल कर जाना है
कुछ नहीं पता इस राह का
फिर भी चलते ही जाना है
जितना पता है इस राह का
उसमें सारे पते खो जाते है
नदी खो जाते हैं समुद्र में
समुद्र का ठिकाना ही नहीं है
कितनी दूर चलकर आया हूँ
कितनी दूर चलकर जाना है
तुम हो नहीं साथ, फिर भी
रास्ता का नियम निभाना है
कैसे कहूँ-चलते चलते थक गया हूँ
तुझे देखा तो ऐसा लगा नहीं थका हूँ
तेरे मुस्कराहट में सच ऐसे खो गया
जैसे राह का भर्मजाल से मैं परे हूँ
तुम कितनी दूर चलकर आये हो
जिसमें तुम थके नहीं दीखते हो
क्या लेकर साथ मुझे सीखा दोगे
इस रास्ता का नियम निभाना है
मजबूरी होगी तुम्हें भी शायद
तब ही तो तुम कुछ नहीं बोलते
सामने से यूँ निकल जाते, जैसे
तुम एक दूसरे को नहीं जानते
सच तुम्हें भी तो आगे बढ़ना है
तुम्हें भी तो असीम को पाना है
मेरे कारण तुम्हें देर ना हो जाय
राह का नियम तुम्हें भी निभाना है
कितनी दूर चलकर आया हूँ
कितनी दूर चलकर जाना है
तुम हो नहीं साथ, फिर भी
राह पर मुझे चलते जाना है
कितनी दूर चल कर जाना है
कुछ नहीं पता इस राह का
फिर भी चलते ही जाना है
जितना पता है इस राह का
उसमें सारे पते खो जाते है
नदी खो जाते हैं समुद्र में
समुद्र का ठिकाना ही नहीं है
कितनी दूर चलकर आया हूँ
कितनी दूर चलकर जाना है
तुम हो नहीं साथ, फिर भी
रास्ता का नियम निभाना है
कैसे कहूँ-चलते चलते थक गया हूँ
तुझे देखा तो ऐसा लगा नहीं थका हूँ
तेरे मुस्कराहट में सच ऐसे खो गया
जैसे राह का भर्मजाल से मैं परे हूँ
तुम कितनी दूर चलकर आये हो
जिसमें तुम थके नहीं दीखते हो
क्या लेकर साथ मुझे सीखा दोगे
इस रास्ता का नियम निभाना है
मजबूरी होगी तुम्हें भी शायद
तब ही तो तुम कुछ नहीं बोलते
सामने से यूँ निकल जाते, जैसे
तुम एक दूसरे को नहीं जानते
सच तुम्हें भी तो आगे बढ़ना है
तुम्हें भी तो असीम को पाना है
मेरे कारण तुम्हें देर ना हो जाय
राह का नियम तुम्हें भी निभाना है
कितनी दूर चलकर आया हूँ
कितनी दूर चलकर जाना है
तुम हो नहीं साथ, फिर भी
राह पर मुझे चलते जाना है

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