Thursday, April 28, 2016

पल पल साथ रह लेता हूँ

कुछ पल खोकर तुममें 
रोज साथ हो लेता हूँ 
तुझे प्यार करने के लिए
कुछ पल निकाल लेता हूँ 

तुम हो साथ ऐसा सोच
रोज प्यार कर लेता हूँ 
रहते अगर साथ तुम 
यही सोच बीता लेता हूँ 

तुम साथ हो या नहीं 
ये याद नहीं रखता हूँ 
प्यार के पल को लिख
पन्नों को भर लेता हूँ 

पागल हूँ दीवाना हूँ 
उम्र नहीं,नहीं सोचता हूँ 
तेरे संग रहने की ललक
सार्थक कर लेता हूँ 

पल में गुस्सा पल में नफरत
भूलने की कोशिश करता हूँ
जैसे ही महसूसता तुम नहीं
फिर याद में तुझे ले आता हूँ 

कैसे इतना वर्ष बीत गया
कुछ मलाल नहीं होता है 
तुम ना होते संग साथ में 
नहीं रह पाता, सोचता है 

रखना ध्यान अपना भी 
नहीं है साथ तो क्या हुआ
यूँहीं बातें कर लेता तुमसे
नहीं तू सुनते तो क्या हुआ

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