किसी ने सवाल उठाया, वो ऐसे जीता है,
वो ऐसे करता है
नहीं करना चाहिए, क्या क्या करना चाहिए ..
मेरा विचार ..
अर्ज़ है ..
विपदा इस संसार में भांति भांति के हैं असंतोष
जिसको जैसी होती करनी वे पाते उसी में संतोष
कोई नहीं अच्छा कोई नहीं खराब
सब जी लेते हैं एक हक़ से जनाब
जब आते हैं हम जीवन में, किसी तरह भी जी लीजिये
गोल-गोल रोटी को किधर से भी खाने का शुरू कीजिये
किसी का भी जीवन अच्छाई से नहीं भरा है
दिल टटोलने पर असन्तोष दिख ही जाता है
जीना ही अच्छा है, मर तो हम कभी भी लेंगे
मरने के बाद का क्या सचमुच हम जान लेंगे
अगर जान ले मरने का मर्म इस जीवन में
फिर चैन से काम करेंगे जो भी है जीवन में
कोई मुँह फुलाकर बैठे तो उसपर हंसी ही आएगी
कैसे तड़प कर जी रहे हैं फिर भी चेहरे मुस्कुराएगी
धन्यवाद
वो ऐसे करता है
नहीं करना चाहिए, क्या क्या करना चाहिए ..
मेरा विचार ..
अर्ज़ है ..
विपदा इस संसार में भांति भांति के हैं असंतोष
जिसको जैसी होती करनी वे पाते उसी में संतोष
कोई नहीं अच्छा कोई नहीं खराब
सब जी लेते हैं एक हक़ से जनाब
जब आते हैं हम जीवन में, किसी तरह भी जी लीजिये
गोल-गोल रोटी को किधर से भी खाने का शुरू कीजिये
किसी का भी जीवन अच्छाई से नहीं भरा है
दिल टटोलने पर असन्तोष दिख ही जाता है
जीना ही अच्छा है, मर तो हम कभी भी लेंगे
मरने के बाद का क्या सचमुच हम जान लेंगे
अगर जान ले मरने का मर्म इस जीवन में
फिर चैन से काम करेंगे जो भी है जीवन में
कोई मुँह फुलाकर बैठे तो उसपर हंसी ही आएगी
कैसे तड़प कर जी रहे हैं फिर भी चेहरे मुस्कुराएगी
धन्यवाद
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