अर्ज़ है ...
करते ही क्यों हो ब्रेक-अप
दुनिया ही है विनाश के कगार पर
कुछ वर्ष तो जी लो मिलकर
हम अपना जान छिड़कते हैं तुम पर
तेरे आँखों में बसकर
हम जीना चाहते हैं
उन नयनों में खोकर
हम बसना चाहते हैं
कुछ पल तो जी लो मिलकर
हम प्यार लुटाते तुम पर
तुझसे मिलने की चाहत में
हम खड़े हैं जीवन के चौराहे पर
अगर तुम ना पढ़ते
मेरे दर्दों को समझते
नहीं कभी मैं लिखता
यूँ घुट घुट कर ना मरते
इस जीवन में साथ रह लो
ना छोडो यूँ दोराहे पर
तेरे मुस्कुराहट में जी लूँ
ये आस टिकी है तुम पर
करते ही क्यों हो ब्रेक-अप
दुनिया ही है विनाश के कगार पर
कुछ वर्ष तो जी लो मिलकर
हम अपना जान छिड़कते हैं तुम पर
तेरे आँखों में बसकर
हम जीना चाहते हैं
उन नयनों में खोकर
हम बसना चाहते हैं
कुछ पल तो जी लो मिलकर
हम प्यार लुटाते तुम पर
तुझसे मिलने की चाहत में
हम खड़े हैं जीवन के चौराहे पर
अगर तुम ना पढ़ते
मेरे दर्दों को समझते
नहीं कभी मैं लिखता
यूँ घुट घुट कर ना मरते
इस जीवन में साथ रह लो
ना छोडो यूँ दोराहे पर
तेरे मुस्कुराहट में जी लूँ
ये आस टिकी है तुम पर

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