कहाँ हो जुल्मी बताओ जरा
तेरी याद आई, बताओ जरा
तेरे मुस्कुराहटों में हम थे खो जाते
बरबस हंसी पर थे खिलखिलाते
फिर एक बार साथ मुस्कुराओ जरा
खोये कहाँ हो जुल्मी बताओ जरा
कहाँ हो जुल्मी बताओ जरा...
तेरे खुशबु के साए में खोते थे हम
तेरे सुरमयी गाने पर रिझते थे हम
अपने कदमों की आहट सुनाओ जरा
कहाँ व्यस्त हो तुम बताओ भी जरा
कहाँ हो जुल्मी बताओ जरा...
मुकाम बनकर जिंदगी तय कर लेते
बन्दिगी बनकर रंगीनियाँ भर लेते
हर पल तुमसे हम मिलते जुलते जरा
किस वादियों में खो गए बताओ जरा
कहाँ हो जुल्मी बताओ जरा...
अर्ज़ है ..
ये गज़ल है निर्झर जल सा बह जाती है
दूर कहीं सागर से मिलने को चली जाती है
कौन कहता है वो पास रहते तो मिल लेते
पतंग सा उड़कर दूर आसमाँ में खो जाती है
तेरी याद आई, बताओ जरा
तेरे मुस्कुराहटों में हम थे खो जाते
बरबस हंसी पर थे खिलखिलाते
फिर एक बार साथ मुस्कुराओ जरा
खोये कहाँ हो जुल्मी बताओ जरा
कहाँ हो जुल्मी बताओ जरा...
तेरे खुशबु के साए में खोते थे हम
तेरे सुरमयी गाने पर रिझते थे हम
अपने कदमों की आहट सुनाओ जरा
कहाँ व्यस्त हो तुम बताओ भी जरा
कहाँ हो जुल्मी बताओ जरा...
मुकाम बनकर जिंदगी तय कर लेते
बन्दिगी बनकर रंगीनियाँ भर लेते
हर पल तुमसे हम मिलते जुलते जरा
किस वादियों में खो गए बताओ जरा
कहाँ हो जुल्मी बताओ जरा...
अर्ज़ है ..
ये गज़ल है निर्झर जल सा बह जाती है
दूर कहीं सागर से मिलने को चली जाती है
कौन कहता है वो पास रहते तो मिल लेते
पतंग सा उड़कर दूर आसमाँ में खो जाती है

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