अर्ज़ है :-
जबतक जिंदगी को "कोई" पढ़ ना ले
जिंदगी शांत नहीं महसूस करता
जबतक "मैं" शांत नहीं रहता
"जिंदगी" अशांत सा भटकता रहता
अर्ज़ है :-
क्यों कोहराम मच जाता है प्यार कर लेने पर
क्यों औरों का दिल जल जाता है प्यार कर लेने पर
अर्ज़ है :-
कौन सी जीत, कौन सी हार
तय तो हो पहले कौन हैं पहनानेवाला हार
अगर जीत कर भी तुम ना मिले
तो क्या करेगा लेकर वो हार !
अर्ज़ है :-
सामने रहकर तो इतनी अनसुनी करते
फिर पीछे कौन आँकेगा मेरी "जीत या हार"
अर्ज़ है :-
लिख भी लेते तो क्या होता
उन्हें पढ़ना जो नहीं था मेरा किताब
अनपढ़ कौन पढ़े-लिखे होते हैं
फिर भी कर लेते ख़ूबसूरती से हिसाब
जबतक जिंदगी को "कोई" पढ़ ना ले
जिंदगी शांत नहीं महसूस करता
जबतक "मैं" शांत नहीं रहता
"जिंदगी" अशांत सा भटकता रहता
अर्ज़ है :-
क्यों कोहराम मच जाता है प्यार कर लेने पर
क्यों औरों का दिल जल जाता है प्यार कर लेने पर
अर्ज़ है :-
कौन सी जीत, कौन सी हार
तय तो हो पहले कौन हैं पहनानेवाला हार
अगर जीत कर भी तुम ना मिले
तो क्या करेगा लेकर वो हार !
अर्ज़ है :-
सामने रहकर तो इतनी अनसुनी करते
फिर पीछे कौन आँकेगा मेरी "जीत या हार"
अर्ज़ है :-
लिख भी लेते तो क्या होता
उन्हें पढ़ना जो नहीं था मेरा किताब
अनपढ़ कौन पढ़े-लिखे होते हैं
फिर भी कर लेते ख़ूबसूरती से हिसाब
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