Tuesday, November 18, 2014

खो जाऊंगा-उड़ जाऊंगा

मैं खो जाऊंगा 
मैं चला जाऊंगा 
दुनिया के उजाले से 
मैं उड़ जाऊंगा 

कौन मैं - कैसा मैं - किसका मैं 
मेरा मैं या तेरा मैं या हमदोनो का मैं 
न मेरा मैं - न तेरा मैं - न हमदोनो का मैं 
मैं तो बस मैं होता- न तेरा होता न मेरा- ये मैं 

मैं उड़ जाऊंगा 
मैं चला जाऊंगा 
रात के अँधेरे में  
मैं खो जाऊंगा 

कर्मजाल हैं फैले-फैले 
विस्तृत है माया जाल 
जीते-मरते रस्ते में 
रह जाते यह तन-कंकाल 

मैं खो जाऊंगा 
मैं चला जाऊंगा 
दुनिया के रस्ते से 
मैं उड़ जाऊंगा 

जीवन-जीवन करते करते 
यह तन हो जाता बेहाल 
का-से-कहूँ मनवा की बात 
सब-हैं-अपने में ही बेहाल 

मैं खो जाऊंगा 
मैं चला जाऊंगा 
मन के मायाजाल से 
मैं उड़ जाऊंगा 

कहत कबीर सुनो भाई साधु 
कोई किसी का ना है बंधू 
सब हैं चलते अपने अपने रस्ते
सफल वही है जो हैं अपने का बंधू 

मैं खो जाऊंगा 
मैं चला जाऊंगा 
बंधू के भुलावे से 
मैं उड़ जाऊंगा 

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