ओ मृगनैनी चपल सुंदरी
नैन तुम्हारे अति निराले
देखते ही मैं खो जाता
जैसे तुम में हों मधु-प्याले
मद-भरे होठों को देख
छूने को मन होता बेहाल
नाक पकड़ इक्छा होती
पूछूँ क्या है गोरी-तेरा हाल
माशा-अल्लाह तेरे गाल
छुपा लिया है डिंपल को
छूने को हाथ बढ़ जाता
देख मनमोहक तस्वीर को
तेरे देखने का नायब अंदाज़
है बहुत ही मनमोहक सा
खुशनुमा माहौल छा जाता
झूम जाता मन सावन सा
उस दिन मन बेचैन हो गया था
जब देखा था तुझे ख़ामोशी में
देख के तेरा ये दमकता चेहरा
लगा कि तू है बहुत गर्मजोशी में
तुझे भी दिल में नहीं है कि
भेंट करे इतने दिन के बाद
तभी तो बस तुम खामोश हो
नहीं करते तुम कोई फ़रियाद
मेरा क्या है - मैं तो हूँ
तेरे लिए एक दुःख का सागर
जितना दूर रहूँगा तुझसे मैं
उतना ही भरोगे तुम मन-के गागर
दुःख-सुख तो है बस एक माया
छाया रहता है मानव मन पर
जबतक अज्ञान में रहता मानव
तड़पता रहता अँधेरा देखकर
ज्ञान-अज्ञान के इस चक्कर में
हम रहते आये एकदूसरे से भिन्न
ना तुझे जल्दी है-ना मुझे जल्दी है
हमदोनों हैं अनवरत राह के जिन्न
ना सुनने कि अगर मुझे जल्दी होती
कब का फैसला ये दिल ले लिया होता
तुम तो हो अनमोल अनूठे मुसाफिर
तुमपर कोई दवाब कभीं नहीं मैं देता
मिले-न-मिले तुझे कोई फर्क नहीं पड़ता
एक-से-एक नायाब मित्र भरे-पड़े हैं तेरे पास
जो कर देते पूरा तेरा-हर-कमी का अहसास
मेरे पास एक ज्ञान है जो देता है बस आस
ओ मृगनैनी चपल सुंदरी
नैन तुम्हारे अति निराले
देखते ही मैं खो जाता
जैसे तुम में हों मधु-प्याले
नैन तुम्हारे अति निराले
देखते ही मैं खो जाता
जैसे तुम में हों मधु-प्याले
मद-भरे होठों को देख
छूने को मन होता बेहाल
नाक पकड़ इक्छा होती
पूछूँ क्या है गोरी-तेरा हाल
माशा-अल्लाह तेरे गाल
छुपा लिया है डिंपल को
छूने को हाथ बढ़ जाता
देख मनमोहक तस्वीर को
तेरे देखने का नायब अंदाज़
है बहुत ही मनमोहक सा
खुशनुमा माहौल छा जाता
झूम जाता मन सावन सा
उस दिन मन बेचैन हो गया था
जब देखा था तुझे ख़ामोशी में
देख के तेरा ये दमकता चेहरा
लगा कि तू है बहुत गर्मजोशी में
तुझे भी दिल में नहीं है कि
भेंट करे इतने दिन के बाद
तभी तो बस तुम खामोश हो
नहीं करते तुम कोई फ़रियाद
मेरा क्या है - मैं तो हूँ
तेरे लिए एक दुःख का सागर
जितना दूर रहूँगा तुझसे मैं
उतना ही भरोगे तुम मन-के गागर
दुःख-सुख तो है बस एक माया
छाया रहता है मानव मन पर
जबतक अज्ञान में रहता मानव
तड़पता रहता अँधेरा देखकर
ज्ञान-अज्ञान के इस चक्कर में
हम रहते आये एकदूसरे से भिन्न
ना तुझे जल्दी है-ना मुझे जल्दी है
हमदोनों हैं अनवरत राह के जिन्न
ना सुनने कि अगर मुझे जल्दी होती
कब का फैसला ये दिल ले लिया होता
तुम तो हो अनमोल अनूठे मुसाफिर
तुमपर कोई दवाब कभीं नहीं मैं देता
मिले-न-मिले तुझे कोई फर्क नहीं पड़ता
एक-से-एक नायाब मित्र भरे-पड़े हैं तेरे पास
जो कर देते पूरा तेरा-हर-कमी का अहसास
मेरे पास एक ज्ञान है जो देता है बस आस
ओ मृगनैनी चपल सुंदरी
नैन तुम्हारे अति निराले
देखते ही मैं खो जाता
जैसे तुम में हों मधु-प्याले

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