ओ मृगनैनी-मनमोहिनी !
नींद से उठकर
देखता हूँ तुम पास नहीं हो
सोचता हूँ मैं उठा ही क्यों
ये हुस्न-बे-परवाह !
नींद से पहले भी तुम न होते
नींद से उठने बाद भी ना होते
सोचता हूँ मैं उठता ही हूँ क्यों
तुझे भी शायद मेरी जरूरत नहीं
तुम शुरू से ही दूर थे
नज़दीकियां इतनी ही रखते थे
कि दुरी होने पे भी दुरी बनी रहे
वरना इतने जोड़-तोड़ के बाद भी
तुझे इक्छा नहीं हुई मिलने की.
सोचता हूँ इतने दिन बाद भी
मैं नहीं भूल पाया तुम्हें
या तुमने नहीं भूलने दिया
या तेरी तस्वीर ने दूर नहीं जाने दिया
तुझसे अच्छा तो तेरी तस्वीर है
जिससे घंटों में बात कर लेता
देखता तुम नहीं हो हकीकत में
चलो-सपने में तुझे पकड़ता हूँ
वहाँ तुमसे मुलाकात भी होती
बात भी होती - रात भी कटती
और जब नींद से उठकर
देखता हूँ तुम पास नहीं हो
सोचता हूँ मैं उठा ही क्यों
सोचता हूँ मैं उठता ही हूँ क्यों
नींद से उठकर
देखता हूँ तुम पास नहीं हो
सोचता हूँ मैं उठा ही क्यों
ये हुस्न-बे-परवाह !
नींद से पहले भी तुम न होते
नींद से उठने बाद भी ना होते
सोचता हूँ मैं उठता ही हूँ क्यों
तुझे भी शायद मेरी जरूरत नहीं
तुम शुरू से ही दूर थे
नज़दीकियां इतनी ही रखते थे
कि दुरी होने पे भी दुरी बनी रहे
वरना इतने जोड़-तोड़ के बाद भी
तुझे इक्छा नहीं हुई मिलने की.
सोचता हूँ इतने दिन बाद भी
मैं नहीं भूल पाया तुम्हें
या तुमने नहीं भूलने दिया
या तेरी तस्वीर ने दूर नहीं जाने दिया
तुझसे अच्छा तो तेरी तस्वीर है
जिससे घंटों में बात कर लेता
देखता तुम नहीं हो हकीकत में
चलो-सपने में तुझे पकड़ता हूँ
वहाँ तुमसे मुलाकात भी होती
बात भी होती - रात भी कटती
और जब नींद से उठकर
देखता हूँ तुम पास नहीं हो
सोचता हूँ मैं उठा ही क्यों
सोचता हूँ मैं उठता ही हूँ क्यों


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