Thursday, November 13, 2014

नींद - मौत - तप

अज्ञान से देखने पर 
""नींद आधी मौत" जैसा दीखता है 
और 
"मौत मुकम्मल नींद" जैसा दीखता है 

पर ज्ञान की दृष्टि में 
"नींद में आत्मा शरीर में रहते हुए अपने को तोरोताजा करता है"
और 
"मौत में आत्मा शरीर से मुक्त होता है जो कि आत्मा का मूल रूप है"

इससे आगे एक और अवस्था है 
"तप - जिसे मनुष्य जीवन में रहते कर सकता है"

विशेषार्थ - 

"आत्मा तप करने से शक्ति प्राप्त करता है 
यह शक्ति वह केवल मूल रूप में ही कर सकता था
लेकिन जीवन में रहते हुए तप करके शक्ति प्राप्त कर सकता है"

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