Saturday, November 8, 2014

भरा जो तूने दूर से आलिंगन

भरा जो तूने दूर से आलिंगन  
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लगता है तूने दिल से दिया था मेरे को आलिंगन 
दिल गद-गद महसूस रहा है भर के वो आलिंगन 
कैसा तुम महसूस रहे हो भर के मेरा आलिंगन 
क्या तुम भी गद-गद महसूस रहे - मेरा आलिंगन 

अहम तेरा तुझे अपने पे - मुझे बहुत अच्छा लगता
याद आता कैसे तुम विचरण करते थे-अच्छा लगता 
बड़े-बड़े विषयों पे-बड़ी बड़ी बाते करते-अच्छा लगता 
बड़े-बड़े-लोगो से-बड़ी-बड़ी मुलाकातें-अच्छा लगता 

हर कामों में व्यस्त तुम रहते थे-पर लगता मैं था 
हँसते-खिलखिलाते तुम रहते थे-पर लगता मैं था 
सदा अच्छे-अच्छे बात करते - पर लगता मैं था 
हरदम ख़ुशी से दमकते रहते थे -पर लगता मैं था 

देखते-देखते वर्ष बीते-लगता जैसे बिछुड़े कल तुम हो 
रोज सपनों में आते-भूलने नहीं देते-जैसे पास तुम हो 
इकीसवीं सदी में भी सपनों की बात करता-ऐसे तुम हो 
नहीं दे सकता था कोई तकलीफ तुझे-जैसे अपने तुम हो 

क्या कहूँ तुझसे-कैसे कहूँ तुझसे-हरवक़्त तुम ही तुम रहते 
मेरे दिल की भाषा समझ कर भी- तुम हरवक़्त  चुप रहते 
बात करने को तुझे इक्छा नहीं होती क्योंकि तुम छुपे रहते 
छुप-छुप बात करके तुम-अपने हँसते रहते-मुझे  तड़पाते रहते 

भरा जो तूने आज आलिंगन-दिल मेरा सचमुच गद-गद हुआ 
क्या तुम्हें भी महसूस हुआ-दिल तेरा सही में गद-गद हुआ 
राधा-कृष्णा भाव यही है-सचमुच हरवक्त मुझे याद हुआ 
काया-माया-तृष्णा क्या है-सचमुच तेरी मूर्त जाग्रत हुआ 

तुम कोई मंज़िल नहीं-तुम तो हो राही-हमसफ़र प्यार के 
एक बार जो तुम बोल देते - बोल भी लेता - बोली प्यार के
जिद तेरा भी मुझे अच्छा लगता-मुस्कुराता हुआ प्यार के  
नदी की तरह-बिन कहे-मिल जाएँ- निभाएं बंधन प्यार के

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