क्यों तुझे ज़रुरत पड़ी छुपने की
मैंने तो केवल तुझे जानना चाहा
खुदा की तरह.
खुदा कहाँ छुपता
जब उसे जानने की कोई कोशिश करता
वह बरबस सहायता करता
वह रास्ता दिखाता.
कितना अच्छा होता
कि दूर से ही तुझे देख पाता
चाँद की तरह तुझे निहार पाता
तेरे मृगनयनी आँखों में झांक पाता
पर अँधेरे के कारण
वो भी नहीं देख पाता
पर फिर भी
खुदा से दुआ करता
कि जहाँ कहीं भी तू रहे
बस हँसते रहे-खिलखिलाते रहे.
ऐसे तेरे छुप जाने से
खुदा भी पूछता-कौन है वो
जिसकी तुम हरवक़्त दुआ करते
कैसा दिखता है वो.
मैं मायूस होता
तुझे नहीं दिखा पाता और सोचता
अगर तुम कहीं दिखते
तो खुदा को भी दिखा सकता.
वस्तुतः में तुम जहाँ हो
वहाँ तो तुम दिखते ही हो
छुपे तो बस मुझसे हो
ये दुरी-ये गुस्सा केवल मुझसे है
फिर भी खुदा से
मैं हँस के बोल देता
वो ऐसे है
वो वैसे है
आप देखोगे तो स्वतः आशीर्वाद दोगे.
खुदा भी मुस्करा देता
और कहता-जा तेरी मुराद पूरी हो
वो खुश रहे-जहाँ भी रहे -वो खुश रहे.
मैंने तो केवल तुझे जानना चाहा
खुदा की तरह.
खुदा कहाँ छुपता
जब उसे जानने की कोई कोशिश करता
वह बरबस सहायता करता
वह रास्ता दिखाता.
कितना अच्छा होता
कि दूर से ही तुझे देख पाता
चाँद की तरह तुझे निहार पाता
तेरे मृगनयनी आँखों में झांक पाता
पर अँधेरे के कारण
वो भी नहीं देख पाता
पर फिर भी
खुदा से दुआ करता
कि जहाँ कहीं भी तू रहे
बस हँसते रहे-खिलखिलाते रहे.
ऐसे तेरे छुप जाने से
खुदा भी पूछता-कौन है वो
जिसकी तुम हरवक़्त दुआ करते
कैसा दिखता है वो.
मैं मायूस होता
तुझे नहीं दिखा पाता और सोचता
अगर तुम कहीं दिखते
तो खुदा को भी दिखा सकता.
वस्तुतः में तुम जहाँ हो
वहाँ तो तुम दिखते ही हो
छुपे तो बस मुझसे हो
ये दुरी-ये गुस्सा केवल मुझसे है
फिर भी खुदा से
मैं हँस के बोल देता
वो ऐसे है
वो वैसे है
आप देखोगे तो स्वतः आशीर्वाद दोगे.
खुदा भी मुस्करा देता
और कहता-जा तेरी मुराद पूरी हो
वो खुश रहे-जहाँ भी रहे -वो खुश रहे.

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