( Hindi translation of http://birenuniverse.blogspot.com/2014/06/tu-hai-anupam.html )
नहीं चाहता दूर होना
नहीं चाहता नाता तोडना
इसीलिए नहीं साफ़ करता
रिस्ता तेरा रिस्ता अपना
दर्द होता बहुतरे दिल में
कि तुमसे बात नहीं करता
मसल देता हूँ रोज घाव को
खून चुपचाप बहते देखता
घाव भी हँसता मुझपे
पूछता-दर्द क्यों नहीं तुझे होता
फिर मैं घाव हुँ कैसा
मैं बोलता-ये दर्द सकून देता
तू जिस पे मेहरबान होगे
उनको खुशियाँ मिलेगी ही
मुझे कोई ताज़ भी मिल जाय
पर तेरे सामने कुछ भी नहीं
बहुत दर्द होता है अब
पता नहीं- तू क्यों हो जिद्दी
कुछ तो बोलो-कुछ तो सुनो
धरती पे सब हैं तेरे सामने पिद्दी
तू है अनुपम-अनमोल मृगनयनी
जहाँ चैन मिलता सती-पार्वती सा
जन्म-जन्म से भटक रहा मैं
पाया नहीं अभीतक तुम सा
अब आ भी जाओ, जीवन में
बिना शर्त या हो तेरे कोई शर्त
जैसे रखोगे रह लूंगा-जी लूंगा
हर क्षण साथ परत-दर-परत
नहीं चाहता दूर होना
नहीं चाहता नाता तोडना
इसीलिए नहीं साफ़ करता
रिस्ता तेरा रिस्ता अपना
दर्द होता बहुतरे दिल में
कि तुमसे बात नहीं करता
मसल देता हूँ रोज घाव को
खून चुपचाप बहते देखता
घाव भी हँसता मुझपे
पूछता-दर्द क्यों नहीं तुझे होता
फिर मैं घाव हुँ कैसा
मैं बोलता-ये दर्द सकून देता
तू जिस पे मेहरबान होगे
उनको खुशियाँ मिलेगी ही
मुझे कोई ताज़ भी मिल जाय
पर तेरे सामने कुछ भी नहीं
बहुत दर्द होता है अब
पता नहीं- तू क्यों हो जिद्दी
कुछ तो बोलो-कुछ तो सुनो
धरती पे सब हैं तेरे सामने पिद्दी
तू है अनुपम-अनमोल मृगनयनी
जहाँ चैन मिलता सती-पार्वती सा
जन्म-जन्म से भटक रहा मैं
पाया नहीं अभीतक तुम सा
अब आ भी जाओ, जीवन में
बिना शर्त या हो तेरे कोई शर्त
जैसे रखोगे रह लूंगा-जी लूंगा
हर क्षण साथ परत-दर-परत

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