चलो तुम्हें मनाते हैं
विनती करते हैं
गिरगिराते हैं
गुनगुनाते हैं
हँसाते हैं
मुस्कुराते हैं
मनाते हैं
अपने ही रूप को
मेरे सोने रूप को
जो बैठे हैं
शहरो के शहर में
दिलो की बगिया में
बादियों की बादी में
मन की चाहत में
गुमसुम चुपचाप
एक नदी की तरह
कलकल करते हुए
बहती जा रही है
शांति से
निर्भीक सा
एक अति-शांत वातावरण में.
चलो तुम्हें मनाते हैं
साथ साथ गुनगुनाते हैं
तुम्हें हँसाते हैं
संग-संग मुस्कुराते हैं.
चलो तुम्हें मनाते हैं ........ :)
विनती करते हैं
गिरगिराते हैं
गुनगुनाते हैं
हँसाते हैं
मुस्कुराते हैं
मनाते हैं
अपने ही रूप को
मेरे सोने रूप को
जो बैठे हैं
शहरो के शहर में
दिलो की बगिया में
बादियों की बादी में
मन की चाहत में
गुमसुम चुपचाप
एक नदी की तरह
कलकल करते हुए
बहती जा रही है
शांति से
निर्भीक सा
एक अति-शांत वातावरण में.
चलो तुम्हें मनाते हैं
साथ साथ गुनगुनाते हैं
तुम्हें हँसाते हैं
संग-संग मुस्कुराते हैं.
चलो तुम्हें मनाते हैं ........ :)

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