Tuesday, June 24, 2014

लिख लेने दो मृगनैनी

लिख लेने दो मृगनैनी 
दिल की बात 
दो-चार बात 
मन की बात 
पूरी किताब 
लिख लेने दो मृगनैनी ...

किस गम है तू खोई 
ज़माने से दूर सोई 
उठ जा वो कबूतरी 
कबसे संदेशा रोइ 
लिख लेने दो मृगनैनी ..

मन रास से भरा है 
युहीं गीत बन रहा है 
कैसे कैसे दिन काटते  है 
कैसे कैसे कटती रातें ..आह 
लिख लेने दो मृगनैनी ..

तेरे प्यार में गोरी 
दिल से करता बात 
मन-मस्तिस्क ना भाये  
जब करनी हो तेरी बात 

लिख लेने दो मृगनैनी 
दिल की बात 
दो-चार बात 
मन की बात 
पूरी किताब 
लिख लेने दो मृगनैनी ....

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