Tuesday, December 9, 2014

आ जाऊं - चल आ जाती हूँ

तुम्हे कब से बोल रहा हूँ
अंखियाँ मे झांक कर कह रहा हूँ
कि  मत दिमाग लगा हमारे प्यार मे
दिल से बात कर ले- दिल से कह रहा हूँ

जब तुम छुपकर
नकली बनकर
बहरूपिए भेष मे
हूमसे पुच्च्ती हो
कि आ जाऊं 
सचमुच आ जाऊं 
चल आ जाती हूँ

तब तेरी एक तस्वीर की मुद्रा
याद आ जाती है
जिसमे तुमने
आंखो मे झाँकते हुये
खिंचवाया है
जिसमे तुमने
अपने हसीन चहरे को
हाथ पे टिकाया है 
बाल खुले है
दिल के विचार
तेरे चमकते आंखो से
गुलाबी गालो से
हल्की डिंपल से
मुस्कुराते चेहरे से
ब्यान करती है
कि  आ जाऊं 
सचमुच आ जाऊं 
चल आ जाती हूँ

ये कौन  सी तारीख की तस्वीर है
क्या तुझे याद है
कि तुम उस दिन से
बोल रहे हो
कि आ जाऊं  
सचमुच आ जाऊं 
चल आ जाती हूँ
पर हकीकत  मे जब
मैं बात करना चाहता
तुझे सुनना चाहता
तो तुम ऐसे कतरा जाते
जैसे कभी पहचान ही ना हो
और मैं  बस
सोचता रह जाता
कि ये सपना है
या हक़ीक़त है
कि आ जाऊं 
सचमुच आ जाऊं 
चल आ जाती हूँ .

दूरी तो बस एक पर्दे की है
अब तुम इसे मीलों दूर कर रहे हो
तो ये तेरी बात है

"अर्रे आना, सचमुच मे आना
ये तो बहुत नसीब की बाते होंगे
कमसेकम अभी के पल तो जी ले दोस्ती के
आयेज की बाते हुंमिल के फैसला करेंगे"

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