तेरा दुःख जानकार
मैं दुखी हो गया
तेरे दुःख के सामने
मेरा दुःख भाग गया
तेरे दुःख का निदान ढूंढा
मैं जोर-जोर हंसने लगा
मैं अपने दुःख भूल जाऊं
तेरा दुःख भी भागने लगा
कोई जब मुस्कुराता है
उसके पीछे कारण होता है
वह कारण और कुछ नहीं
संतोष का पराकाष्ठा होता है
मैं ये पा लूँ, जब मन कहता है
पूछ लेता हूँ अब अपने मन से
किसी को दुःख तो नहीं होता है
किसी को मेरे इक्क्षा पाने से
तब इक्क्षा पाना या ना पाना
यह प्रश्न दुःख नहीं बनता है
मन एकदम शांत हो जाता है
और इक्क्षा ख़त्म हो जाता है
फिर मैं मुस्कुराने लगता हूँ
अपने दुःख पर हंसने लगता हूँ
तेरे दुःख पर हंसने लगता हूँ
पाने का विचार खोने लगता हूँ
यह ज्ञान सचमुच आज ही आया
जब मैं अपने दुःख के कारण को
तेरे दुःख से जोड़ा,तुझ से जोड़ा
तेरे दुःख को निदान करने को
तेरे दुःख का निदान ढूंढकर
मैं जोर-जोर से हंसने लगा
मेरा दुःख छोटा पड़ गया
दोनोँ का दुःख भागने लगा
जब कोई कुछ पाने को चाहता
उसकी स्थिति नाजुक होती
ऐसा कह सकते-उसकी स्थिति
कुएँ में रहने जैसे ही है होती
कैसे कोई कूआँ में रहकर
पानी का उपयोग है कर सकता
यही पानी कुएँ से बाहर रहकर
जब पानी लाता,बहुत स्वाद पाता
सच कहूँ, इक्क्षा की स्थिति भी
कुएँ में रहने जैसे कुछ-कुछ होती
पाना चाहता अज्ञान में रहकर
सही में बड़ी दयनीय स्थिति होती
तेरा दुःख जानकार
मैं दुखी हो गया
तेरे दुःख के सामने
मेरा दुःख भाग गया
तेरे दुःख का निदान ढूंढा
मैं जोर-जोर हंसने लगा
मैं अपने दुःख भूल जाऊं
तेरा दुःख भी भागने लगा
मैं जोर-जोर से हंसने लगा
बैठे-बैठे गुनगुनाने लगा
तुझसे बातें करने लगा
मन-ही-मन मुस्कुराने लगा
मैं दुखी हो गया
तेरे दुःख के सामने
मेरा दुःख भाग गया
तेरे दुःख का निदान ढूंढा
मैं जोर-जोर हंसने लगा
मैं अपने दुःख भूल जाऊं
तेरा दुःख भी भागने लगा
कोई जब मुस्कुराता है
उसके पीछे कारण होता है
वह कारण और कुछ नहीं
संतोष का पराकाष्ठा होता है
मैं ये पा लूँ, जब मन कहता है
पूछ लेता हूँ अब अपने मन से
किसी को दुःख तो नहीं होता है
किसी को मेरे इक्क्षा पाने से
तब इक्क्षा पाना या ना पाना
यह प्रश्न दुःख नहीं बनता है
मन एकदम शांत हो जाता है
और इक्क्षा ख़त्म हो जाता है
फिर मैं मुस्कुराने लगता हूँ
अपने दुःख पर हंसने लगता हूँ
तेरे दुःख पर हंसने लगता हूँ
पाने का विचार खोने लगता हूँ
यह ज्ञान सचमुच आज ही आया
जब मैं अपने दुःख के कारण को
तेरे दुःख से जोड़ा,तुझ से जोड़ा
तेरे दुःख को निदान करने को
तेरे दुःख का निदान ढूंढकर
मैं जोर-जोर से हंसने लगा
मेरा दुःख छोटा पड़ गया
दोनोँ का दुःख भागने लगा
जब कोई कुछ पाने को चाहता
उसकी स्थिति नाजुक होती
ऐसा कह सकते-उसकी स्थिति
कुएँ में रहने जैसे ही है होती
कैसे कोई कूआँ में रहकर
पानी का उपयोग है कर सकता
यही पानी कुएँ से बाहर रहकर
जब पानी लाता,बहुत स्वाद पाता
सच कहूँ, इक्क्षा की स्थिति भी
कुएँ में रहने जैसे कुछ-कुछ होती
पाना चाहता अज्ञान में रहकर
सही में बड़ी दयनीय स्थिति होती
तेरा दुःख जानकार
मैं दुखी हो गया
तेरे दुःख के सामने
मेरा दुःख भाग गया
तेरे दुःख का निदान ढूंढा
मैं जोर-जोर हंसने लगा
मैं अपने दुःख भूल जाऊं
तेरा दुःख भी भागने लगा
मैं जोर-जोर से हंसने लगा
बैठे-बैठे गुनगुनाने लगा
तुझसे बातें करने लगा
मन-ही-मन मुस्कुराने लगा
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