Friday, December 26, 2014

अहम् - वहम्

तुम मुझे छूट दो 
मैं तुम्हें मुझसे छूटने नहीं दूंगा 
तुम मुझे छुटकारा दोगे
मैं जीवन से ही छुटकारा पा लूंगा

यह छूटना 
तुम्हें तो पच जायेगा
पर सचमुच 
मुझसे नहीं पचाया जाएगा 

तुम कहते 
मुझे अहम् भी है वहम् है

अहम् पर शेर बोलता हूँ- 
कब रहा मुझ में अहम्, ये तुम मुझे बता दो 
कितनी बार तेरे आँखों में झाँका,फिर भी कहते बता दो 

मांगता कुछ किसी से जब कोई समझता नहीं है 
तुम समझ के भी अनजान हो,फिर मांगू कैसे,ये बता दो 

वहम् पर  हकीकत बोलता हूँ - 
अगर मुझे वहम् होता, मैं सचमुच तुम्हें नहीं चाहता 
तुम तो पानी की तरह निश्छल हो, मैं कैसे तुम्हें नहीं चाहता

इतनी चाह है मुझे तेरे लिए, जितनी मुझे अपनी जिंदगी की नहीं
कैसे जी रहा हूँ मैं अपनी जिंदगी, सचमुच ये मुझे कुछ पता नहीं  

इस अहम् और वहम् से - "अ" और "व्" दोनों निकल गया है 
हम-दम बनने के लिए, दोनों शब्दों का  "हम" सिर्फ बच गया है  

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