Wednesday, June 22, 2016

क्यों रोक लेता हूँ तुम्हें कुछ कहने को

अच्छा ये बताओ 
इतना तुम्हें चाहकर भी 
क्यूँ रुक जाता हूँ 
क्यों रोक लेता हूँ 
तुम्हें कुछ कहने को 
तुमसे बात करने को 
साथ साथ मुस्कुराने को 
संग संग चलने को 

तुम्हें क्या आश्चर्य नहीं होता 
तुम क्या कभी नहीं सोचते 
नहीं सोचते तभी तो नहीं पूछते 
नहीं सोचते तभी मुझे तड़पने देते 

बिन पूछे तुम्हें एक बार चाहा था 
तुम्हें अपने दिल में रखना 
बिन तुम्हे बताये एक बार चाहा था 
तेरे संग संग जीवन बिताना 

पर बात तुम कहाँ से कहाँ ले गए 
उन लोगों ने भी तुम्हें दिया ध्यान 
कितना दर्द मिला उन लोगों से 
सच पूछो नहीं करना चाहता ब्यान

ना उस दर्द का गिला है तुझसे 
ना ही कोई शिकवा है तुझसे  
बात आई गई बीत गई,दिल पूछता 
क्यों ना करूँ प्यार तुझसे 

अच्छा ये बताओ 
इतना तुम्हें चाहकर भी 
क्यूँ रुक जाता हूँ 
क्यों रोक लेता हूँ 
तुमसे हाँ चाहता बात करने को 
तुमसे हाँ चाहता साथ मुस्कुराने को 
तुमसे हाँ चाहता संग संग चलने को 
तुमसे हाँ चाहता आगे बढ़ने को 

शेर अर्ज़ है 
ऐसा नहीं कि तुम बिन जीना सीख गया हूँ 
तड़पन में केवल आहें भरना जान गया हूँ 

मुस्कुराता हूँ क्योंकि तुम मुस्कुराते थे 
जीता हूँ क्योंकि तुम जिलाना चाहते थे 

मुस्कराहट तो बस दुनिया के लिए है 
क्योंकि दुनिया मुस्कराहट चाहती है 

इन सब बातों के लिए तुम कभी गम ना करना 
पहले भी किसी ने नहीं किया,तुम भी ना करना 

दुनिया का काम है चलना,हम सब चलते जायेंगे 
अपना अपना काम करते नाम छोड़ते चले जायेंगे 

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