Wednesday, June 1, 2016

मिले ना मिले बस चल मुस्कुराता

चन्द चटपटा शेर ...

आते जाते रोज उसकी साँसे महकती है

कहता है आज कर या कल कर पर कर प्यार
पर उसके तेवर देखकर यही लगता है
उसे प्यार की जरूरत नहीं,वह खुद ही है प्यार

एकाकी में मेरी तो जिंदगी गुजर गई

किसी तरह आगे भी गुजर जायेगी
दिल धड़कता है सिर्फ उसके लिए
ये धड़कन लुढ़कते मेरे साथ जायगी

जिद कर सकता नहीं,उसे भी वक्त नहीं

क्योंकि आजकल कोई सुनता भी नहीं
सरकार भी नहीं सुनती,सरकार जानती
जितना टैक्स बढ़ा लो,कोई बोलेगा नहीं

उसके तेवर देखकर मिर्ची की याद आ जाती

जरा सा चखा नहीं कि तेज तीखापन लगती
दिल धड़काती, आँसूं छलकाती, मुँह जलाती
गोल गोल होठ कर सी सी कर सीटी बजाती

कौन कहता है कि ये दुनिया बड़ी जालिम है

दुखों का पहाड़ है, जीवन में बहुत सताती है,
मैं तो कहता हूँ कि दुःख है अज्ञान की तरह
ज्ञान आने पर मदमस्त हाथी सा चलती है

वह जितना दूर है दुःख ही दुःख आता है

अज्ञान का चादर फैलाता, आँसू बहाता
तभी ये दुनिया ज्ञान की लहर सी बहाती
कहता-मिले ना मिले बस चल मुस्कुराता

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