अब तो तेरी तस्वीर भी
मैं देख नहीं पाता
कैसे कैसे रह लेता हूँ,
क्या कहूँ गोरी तुझसे
मिलने को बेचैन रहता हूँ
जानना चाहता कैसे हो तुम
छूना चाहता समूचा तुमको
कैसे कैसे तुमने दिन बिताये
देखना चाहता हूँ तुमको
जानकर भी अनजान बने हो
हमसे ही दूर बने हो
कैसे कैसे जी लेता हूँ,
क्या कहूँ गोरी तुझसे
मिलने को बेचैन रहता हूँ
हक़ ही नहीं दिए मुझे
जानने या पूछने का
कैसे कैसे मैं दिन बिताऊं
दिल करता है कहने का
अबतो चेहरे किताब से भी
दूर हो गया हूँ
सचमुच बेचैन रहता हूँ
क्या कहूँ गोरी तुझसे
मिलने को बेचैन रहता हूँ
दिल करता हँसूं तेरे संग
दिल कहता खेलूं तेरे संग
मन के तरंग से छेड़ूँ तुझे
चलूँ हमेशा तेरे संग-संग
अब तो तेरी तस्वीर भी
देख नहीं पाता हूँ
तड़पते हुए रह लेता हूँ,
क्या कहूँ गोरी तुझसे
मिलने को बेचैन रहता हूँ
क्या करना पड़ेगा गोरी
ये मुझे बतलाओ भी
बहुत हो गया दूर रहे
अब पास आओ भी
अब तो तेरी तस्वीर भी
मैं देख नहीं पाता
कैसे कैसे रह लेता हूँ,
क्या कहूँ गोरी तुझसे
मिलने को बेचैन रहता हूँ
मैं देख नहीं पाता
कैसे कैसे रह लेता हूँ,
क्या कहूँ गोरी तुझसे
मिलने को बेचैन रहता हूँ
जानना चाहता कैसे हो तुम
छूना चाहता समूचा तुमको
कैसे कैसे तुमने दिन बिताये
देखना चाहता हूँ तुमको
जानकर भी अनजान बने हो
हमसे ही दूर बने हो
कैसे कैसे जी लेता हूँ,
क्या कहूँ गोरी तुझसे
मिलने को बेचैन रहता हूँ
हक़ ही नहीं दिए मुझे
जानने या पूछने का
कैसे कैसे मैं दिन बिताऊं
दिल करता है कहने का
अबतो चेहरे किताब से भी
दूर हो गया हूँ
सचमुच बेचैन रहता हूँ
क्या कहूँ गोरी तुझसे
मिलने को बेचैन रहता हूँ
दिल करता हँसूं तेरे संग
दिल कहता खेलूं तेरे संग
मन के तरंग से छेड़ूँ तुझे
चलूँ हमेशा तेरे संग-संग
अब तो तेरी तस्वीर भी
देख नहीं पाता हूँ
तड़पते हुए रह लेता हूँ,
क्या कहूँ गोरी तुझसे
मिलने को बेचैन रहता हूँ
क्या करना पड़ेगा गोरी
ये मुझे बतलाओ भी
बहुत हो गया दूर रहे
अब पास आओ भी
अब तो तेरी तस्वीर भी
मैं देख नहीं पाता
कैसे कैसे रह लेता हूँ,
क्या कहूँ गोरी तुझसे
मिलने को बेचैन रहता हूँ


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