हम सब कहते - हम सबको खुदा ही देगा
इसी सोच में हम जीते रहते - मरते रहते
मगर ये सत्य नहीं है इस जीवन में, सत्य है -
खुदा ने हम सबको दे दिया इस जगत को
अब और वह इससे ज्यादा क्या देगा
क्या ये अक्ल भी दे हम सबको कि
जगत को मिल-बाँट कर भोगना होगा
हम लोग सोचते-हमने जो अर्जन किया
उस अर्जन का मैं ही हूँ सम्पूर्ण भोक्ता
अगर चादर चढाने वाले में से कोई एक सोच लेता
तो एक चादर भिखारी को दे देता
तब ये कारण ही नहीं उपजता
कि भिखारी बाहर ठन्डे से मर गया है
भले भिखारी और कारणों से मरता
एक न एक दिन सबको तो मरना ही है
मिल-बाँट कर रहो-ये खुदा ही कहता
तभी तो वह खामोश से रहता-शांत रहता
वह मुस्कुराता रहता-ज्ञान देता रहता
जिसे लेना है ले लेता-फिर भी खुदा खुश रहता :)
इसी सोच में हम जीते रहते - मरते रहते
मगर ये सत्य नहीं है इस जीवन में, सत्य है -
खुदा ने हम सबको दे दिया इस जगत को
अब और वह इससे ज्यादा क्या देगा
क्या ये अक्ल भी दे हम सबको कि
जगत को मिल-बाँट कर भोगना होगा
हम लोग सोचते-हमने जो अर्जन किया
उस अर्जन का मैं ही हूँ सम्पूर्ण भोक्ता
अगर चादर चढाने वाले में से कोई एक सोच लेता
तो एक चादर भिखारी को दे देता
तब ये कारण ही नहीं उपजता
कि भिखारी बाहर ठन्डे से मर गया है
भले भिखारी और कारणों से मरता
एक न एक दिन सबको तो मरना ही है
मिल-बाँट कर रहो-ये खुदा ही कहता
तभी तो वह खामोश से रहता-शांत रहता
वह मुस्कुराता रहता-ज्ञान देता रहता
जिसे लेना है ले लेता-फिर भी खुदा खुश रहता :)

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