क्यों ऐसा लगता कि
गलती करता रहूँ तुझसे
हंसी ठिठोली करता रहूँ
तुझसे
नाजों से मैं तुम्हें
गुदगुदी लगाऊँ
हंसी ही हंसी में गलती कर
जाऊँ
खाली पिली का गुस्सा
दिलाऊँ
बातों ही बातों में तुझे
मनाऊँ
ऐसा क्युँ लगता कि
गलती करता रहूँ तुझसे
हंसी ठिठोली करता रहूँ
तुझसे
मान मत ज्ञानी मुझे
ज्ञान बखारना नहीं तुझसे
आँखों ही आँखों में
इशारा करता रहूँ तुझसे
ऐसा क्यों लगता कि
लाड लगाऊँ मैं तुझसे
मीत सा रीत निभाऊँ मैं
तुझसे
करने दे गोरी मुझे तुझसे
ही प्यार
यार यार कह के करने दे
प्यार
नैनों की भाषा पढ़ पढ़ के
तुझसे
खोता जाऊँ सागर में मिलता
रहूँ तुझसे
ऐसा क्यों लगता कि
प्यार करता रहूँ तुझसे
बार बार गलती करता रहूँ
तुझसे
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