भगवत् भान और ज्ञान
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सही में कितने मुर्ख हैं ये लोग
घोषित कर लेतेे कुछ का कुछ
अपने को कहवाना दुनिया में
भगवान या देवी या और कुछ
घोषित कर लेतेे कुछ का कुछ
अपने को कहवाना दुनिया में
भगवान या देवी या और कुछ
ज्ञान की कमी से ही मानव होता
ज्ञान आने पर देव सा होता मानव
ज्ञान ना रहने पर ही दानव होता
ज्ञान आने फिर क्यों बनते दानव
ज्ञान आने पर देव सा होता मानव
ज्ञान ना रहने पर ही दानव होता
ज्ञान आने फिर क्यों बनते दानव
दानवी प्रविर्ति ही तो है कहलाता
लाचारों को लूटना, बेबस बनाना
और ऐसे मनुष्य भगवान् बनकर
करते हैं मुर्ख बनाना और ठगना
लाचारों को लूटना, बेबस बनाना
और ऐसे मनुष्य भगवान् बनकर
करते हैं मुर्ख बनाना और ठगना
मानव तो है ही बेवस और लाचार
तभी तो झुक जाते और लूट जाते
ऐसे मानव को पता ही नहीं होता
कि ये देव बने दानव लूट रहे होते
तभी तो झुक जाते और लूट जाते
ऐसे मानव को पता ही नहीं होता
कि ये देव बने दानव लूट रहे होते
मजे की बात ये तब हो जाती जग में
जब देव बने ऐसे दानव खुद भटकते
मूर्खों को भटकाते औरों को भरमाते
अपनें स्वार्थों को बस पूरा करते रहते
जब देव बने ऐसे दानव खुद भटकते
मूर्खों को भटकाते औरों को भरमाते
अपनें स्वार्थों को बस पूरा करते रहते
जिसे भान हो जाता है उस देव का
उसका ये जग हो जाता अपने आप
फिर किसको लूटना क्या भटकाना
शांत हो जाता सचमुच अपने आप
उसका ये जग हो जाता अपने आप
फिर किसको लूटना क्या भटकाना
शांत हो जाता सचमुच अपने आप
और जिसे ज्ञान हो गया हो देव का
उसके लिए सचमुच क्या है कहना
कुछ किया फिर भी होता ना किया
कुछ नहीं किया फिर होता है करना
उसके लिए सचमुच क्या है कहना
कुछ किया फिर भी होता ना किया
कुछ नहीं किया फिर होता है करना
क्रिया कर्म कारक सब मिलकर
कर्त्ता धर्ता बन जाता इस जग में
सम भाव सा रहकर ज्ञान फैलाना
बस कर्म रह जाता है इस जग में
कर्त्ता धर्ता बन जाता इस जग में
सम भाव सा रहकर ज्ञान फैलाना
बस कर्म रह जाता है इस जग में
नाम बड़ा है कि काम बड़ा है
सचमुच में है यह जग निराला
धू धू कर जल जाती ये काया
सदा प्यासा रहता प्यार प्याला
सचमुच में है यह जग निराला
धू धू कर जल जाती ये काया
सदा प्यासा रहता प्यार प्याला
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