Thursday, March 19, 2015

दर्द क्या है पता नहीं

कोई पूछे अगर, दर्द क्या है, निकलेगा मुँह से पता नहीं 
दिल पूछता, दर्द करूँ या ना करूँ, दिल कहता, पता नहीं 

दर्द जिसके लिए करूँ,वह बेदर्द बन बैठा है 
दर्द फिर भी करूँ, ऐसा क्यों दिल कहता है 

सचमुच क्यों अपने लोग ही मतलबी बन जाते हैं
सबकुछ जानते हुए भी वे अनजान बन जाते हैं 

कितना ज्ञान आ जाता, उनके दिल में बेरहमी का 
सामने दीखते हुए भी वे रहम से मरहूम रहते हैं 

सही कहा है किसी ने ...
ज़िन्दगी तनहा सफर की रात है 
अपने अपने हौसले की बात है !!

फिर भी मस्ती में दिल ये गाता
मुस्कुराता हुआ अपना दिल कहता 
जी लो तुम भी, जीता हूँ मैं भी 
ना जिए साथ, तनहा जी लेता हूँ मैं भी
हो तुम्हें मुबारक जनमदिन का 
मुस्कुराते रहो हर-दिन का 

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