दिमाग से कोई बात करता
मैं अक्सरहाँ बादाम खाता
दिल से जब कोई बात करता
मैं प्यार से उनकी बात खाता
खता क्या हुई मुझसे
आज तक पता नहीं
खता क्या हुई तुझसे
अबतक मुझे पता नहीं
क्यों मैं दूर हूँ तुझसे
अबतक मुझे पता नहीं
क्यों तू मुझसे दूर हो
इसका मुझे आभास नहीं
जब भी तुझसे बात करता
जैसे आइना हो मेरे सामने
अपने नयनों को तेरा समझ
बात करता आमने -सामने
जिद क्या है तुझे ना बात करने की
मुझे सचमुच कुछ भी पता नहीं
अब तुमने मनवा दिया है मुझे
कि तुझे बात करने का मन नहीं
मैं अक्सरहाँ बादाम खाता
दिल से जब कोई बात करता
मैं प्यार से उनकी बात खाता
खता क्या हुई मुझसे
आज तक पता नहीं
खता क्या हुई तुझसे
अबतक मुझे पता नहीं
क्यों मैं दूर हूँ तुझसे
अबतक मुझे पता नहीं
क्यों तू मुझसे दूर हो
इसका मुझे आभास नहीं
जब भी तुझसे बात करता
जैसे आइना हो मेरे सामने
अपने नयनों को तेरा समझ
बात करता आमने -सामने
जिद क्या है तुझे ना बात करने की
मुझे सचमुच कुछ भी पता नहीं
अब तुमने मनवा दिया है मुझे
कि तुझे बात करने का मन नहीं
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