
ये वसन्त की फुहार है
रंगों की बाहर
हर तरफ चहल पहल
लाया मंद मंद व्यार.
झूमते रहे हम घूमते रहे
कभी फुदक कभी इतर
बिखराते रहे मुस्कान
ये है होली का त्योहार.
तितली के मन तितली
पराग कण से सराबोर
भॉंरे भी मदमस्त है
रस से पोर पोर.
सब तरफ रंग बिरंग
तन-मन मे व्यार.
लाया ये कौन पवन
ये है रंगो का त्योहार.
ये है होली का त्योहार
बहुत अच्छी रचना है बिरेन्द्र जी...
ReplyDeletethank you
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